Abhivyakti Me Aapki Pratikriya


1660 19.05.2011, at 19:03:20
Aapka Naam: sakshi dixit
Email: sakshi.s.dixit@gmail.com
Where are you from?: ahmedabad
Rachana Ka Shirshak: bachapan
Lekhak Ka Naam: usha mahajan
Comments: aapke dwara bachcho ke manovigyan ko sahajta se prastut kiya gaya hai.mujhe kahani bahut achchhi lagi.aasha hai ki aapko phir se padhu.



1659 19.05.2011, at 16:14:59
Aapka Naam: AJAY
Email: VERMA
Where are you from?: SULTANPUR
Rachana Ka Shirshak: SILE HUE OTH
Lekhak Ka Naam: JAYNANDAN
Comments: I like this story very much..it's true that today every one is very helpless against system..No body have enough courage to say against the system/corruption.



1658 18.05.2011, at 13:44:54
Aapka Naam: AJAY KUMAR VERMA
Email: wanatalkwith.ajay@gmail.com
Where are you from?: Sultanpur
Rachana Ka Shirshak: Samarpan
Lekhak Ka Naam:
Comments: I like this story very much..
Thanks a lot for post such type of Story..



1657 17.05.2011, at 18:29:10
Aapka Naam: प्रेम सिल्ही
Email: psilhi@indiatimes.com
Where are you from?: न्यू यार्क, संयुक्त राष्ट्र अमरीका
Rachana Ka Shirshak: बनियान
Lekhak Ka Naam: उमेश अग्निहोत्री
Comments: स्वयं पिता होते, मैं इस कहानी में दी सीख को भली भांति देख पा रहा हूँ| संक्षिप्त में, दो पीढ़ियों में समझोता होने पर ही परिवार में सुख व स्थिरता प्राप्त की जा सकती है| अग्निहोत्री जी को इस शिक्षाप्रद कहानी के लिए मेरा धन्यवाद|


1656 16.05.2011, at 18:38:08
Aapka Naam: Manoj Sharma
Email: manoj.hapur@yahoo.com
Where are you from?: Hapur, UP, India
Rachana Ka Shirshak: बनियान
Lekhak Ka Naam: उमेश अग्निहोत्री
Comments: लगता है लेखक ने मेरी ही कहानी लिख दी है. फरक यह है कि मेरे पापा को मेरे मूंछों और बालों के स्टाइल से problem है. परन्तु मैं कहानी के बच्चे की तरह इतना खुशकिस्मत नहीं हूँ. आज ३८ बरस का हो गया , २ बच्चों का बाप बन गया. शीत युद्ध अभी भी जारी है. मेरी मूछें और बाल नैसर्गिक है. यह बदले नहीं जायेंगे. बस पापा को पसंद नहीं......

मजेदार बात है, हर जगह मेरी तारीफ़ करते है, मेरे ऊपर गर्व भी है. पर मेरे से कभी आराम से बात नहीं कर सकते. बहुत अच्छी लगी यह कहानी.

कहानी पर चार लाईने याद आ रही हैं........

"चमन में सबने ही गया तराना जिंदगी का,
मगर सबसे अलग था रंग मेरी ही कहानी का,
तराना इस कदर रंगीन था मेरी जुबानी का
कि जिसने भी सुना कहने लगा मेरी ही कहानी है."






1655 13.05.2011, at 16:39:04
Aapka Naam: pradeep arya
Email: pradeep0204arya@gmail.com
Where are you from?: jaipur
Rachana Ka Shirshak: ramleela
Lekhak Ka Naam: munshi premchand
Comments: vichar to abhi mere apne nihi hai isliye bas shubhakaamnaye de sakta hu.......prayas aapke ho......saflataaye aapki ho .......bas duaaye hamari jarur hogi


1654 12.05.2011, at 03:48:23
Aapka Naam: Kumar Ravindra
Email: kumarravindra310@gmail.com
Where are you from?: Hisar, HARYANA
Rachana Ka Shirshak: Aakash se gira...
Lekhak Ka Naam: Kusum Khemani
Comments:
प्रिय बहन
कुसुम खेमानी,
'अभिव्यक्ति' के इसी सप्ताह के अंक में आपका मारीशस द्वीप पर यात्रा-आलेख आज ही पढ़ा| यथार्थ और काव्यात्मक कल्पना का अद्भुत संगम आपके अन्य आलेखों के समान ही इस आलेख में भी | साधुवाद ! मारीशस द्वीप की यात्रा के लिए लुभाता है यह यात्रावृत्त| साथ ही उस महावेदना से भी परिचित कराता है, जिसे झेलकर वहाँ के भारतवंशी आज के इस स्वर्ग की संरचना कर पाये| गाँधी के रामराज की परिकल्पना भी वहीँ साकार हो पाई है| धन्य है वह लघु भारत और उससे परिचित कराता आपका लेख ! मेरा हार्दिक अभिनन्दन एक बार फिर इस सारस्वत भेंट हेतु !
स्नेह-नमन स्वीकारें |
आपका
कुमार रवीन्द्र


1653 11.05.2011, at 21:38:03
Aapka Naam: अर्चना
Email:
Where are you from?: बैंगलोर
Rachana Ka Shirshak: करिश्मा ब्यूटी पार्लर
Lekhak Ka Naam: इंदिरा दाँगी
Comments: मन को छू लेने वाली कहानी....!!!!


1652 09.05.2011, at 22:33:42
Aapka Naam: प्रेम सिल्ही
Email: psilhi@indiatimes.com
Where are you from?: न्यू यार्क, संयुक्त राष्ट्र अमरीका
Rachana Ka Shirshak: कार्टून-कोना: मई ९, २०११, दाऊद
Lekhak Ka Naam: कीर्तीश भट्ट
Comments: कार्टून देख मुझे एक बहुत पुराना चुटकुला याद हो आया| काफी हाउस में काफी का कप हाथ में थामे एक आदमी ने टेबल पर बैठते पांच कहा और वहां पहले से बैठा व्यक्ति और वह ठहाका लगा कर हंस दिए| ऐसे ही एक एक कर उनके कुछ और साथी वहां आते, कोई नंबर बोलते तथा काफी पीते सभी खिलखिला कर हंस देते| साथ के टेबल पर हैरान बैठे एक व्यक्ति के पूछने पर कि कोई नंबर बोलते वे क्यों हंस देते है, उन्होंने बताया कि वे सभी ट्रेवलिंग सेल्स मेन हैं और समय न होने के कारण वे चुटकुले को पहले से दिया गया नंबर बोल कर उसका पूरा आनंद उठाते हैं| इसी प्रकार कीर्तीश के कार्टून देख कर न कि समाचार पढ़ने की कोई आवश्यकता रह जाती बल्कि व्यंग में सामान्य जीवन का भोज हलका लगने लगता है|


1651 08.05.2011, at 18:15:34
Aapka Naam: प्रेम सिल्ही
Email: psilhi@indiatimes.com
Where are you from?: न्यू यार्क, संयुक्त राष्ट्र अमरीका
Rachana Ka Shirshak: टोबा टेक सिंह
Lekhak Ka Naam: सआदत हसन मंटो
Comments: मैंने अन्यत्र यह कहानी कई बार पढ़ी है| बिशन सिंह जैसे कई पागल हैं जो आज भी देश विभाजन के पहले की यादों के टोबा टेक सिंह में जी रहे हैं|


1650 08.05.2011, at 16:20:59
Aapka Naam: प्रेम सिल्ही
Email: psilhi@indiatimes.com
Where are you from?: न्यू यार्क, संयुक्त राष्ट्र अमरीका
Rachana Ka Shirshak: सोने की आरामकुर्सी
Lekhak Ka Naam: अभिज्ञात
Comments: मनोविज्ञानिक स्तर पर इस कथा का मूल्य तो मैं नहीं जानता लेकिन मेरे लिए तो इस कथा में साधारण जीवन की निराशावृत्ति, अपराधिता, पुलिस की बर्बरता और देश में जंगल राज देखने को मिलते हैं| सभ्य समाज में सुरेश अपनी खरीदी हुई लोहे की आरामकुर्सी के सोने की आरामकुर्सी में बदल जाने को मीडिया में बताने मात्र से ही मालामाल हो जाता| भारतीय समाज में पारम्परिक कथाओं द्वारा लोगों में सदैव सुचरित्र और नैतिकता के भाव उत्पन्न हुए हैं| लेकिन आज के समाज में लकडहारे की लोहे की कुल्हाड़ी की जगह उसकी भारी भरकम पत्नि ने ले ली है और इस युक्ति पर कि वह तीन पत्निओं का भार कैसे उठाएगा, समय पाते वह पहली बार में मिली छैल छबीली औरत को पा संतुष्ट हो जाना चाहता है|
तिस पर लेखक में शब्दों के जाल से कहानी बुनने की क्षमता की अवज्ञा नहीं होनी चाहिए| लेखक को मेरा सुझाव है कि कहानियों में नैतिकता होनी चाहिए ताकि धीरे धीरे समाज में अज्ञान को मिटाया जा सके|


1649 07.05.2011, at 19:41:14
Aapka Naam: julliat khan
Email: faazjunaidkhan@gmail.com
Where are you from?: moradabad up
Rachana Ka Shirshak: rasoighar ke swasth sujhav
Lekhak Ka Naam: alka mishra
Comments: ati uttam hain sujhav.


1648 06.05.2011, at 20:06:47
Aapka Naam: अनुराधा सिंह
Email: anuradhadei@yahoo.co.in
Where are you from?: बंगलोर
Rachana Ka Shirshak: कैक्टस
Lekhak Ka Naam:
Comments: मानव मन का बहुत सजीव चित्रण किया है.


1647 06.05.2011, at 10:51:57
Aapka Naam: अनुराधा सिंह
Email: anuradhadei@yahoo .co .in
Where are you from?: बैंगलोर
Rachana Ka Shirshak: ब्यूटी पार्लर
Lekhak Ka Naam: इंदिरा दाँगी
Comments: बहुत अच्छा इंदिरा जी. कहानी मर्मस्पर्शी है.



1646 06.05.2011, at 10:01:27
Aapka Naam: om narayan tiwari
Email: omi.nisha@gmail.com
Where are you from?: mainpuri u p
Rachana Ka Shirshak: maa
Lekhak Ka Naam: om narayan tiwari < omi >
Comments: Maa ek aisa shabd hai jismen sari duniya samai hai. 8 may ko sari duniya mothers day manata hai per uske baad apni hi maa ko bhul jata hai.insaan itna kyon nirmohi ho gaya hai ki duniya ki chamak dhamak mai maa ko hi bhul jata hai.shrushti ki anmol rachna hai maa.


1645 04.05.2011, at 14:40:26
Aapka Naam: arpit
Email: arpitharsh@gmail.com
Where are you from?: indore MP
Rachana Ka Shirshak:   करिश्मा ब्यूटी पार्लर
Lekhak Ka Naam: इंदिरा दाँगी
Comments: नारी के त्याग और दुख को चित्रित करती यह वुत ही सुँदर कहानी है. राजेश्वरी जैसी महिलाएं मिलना बढा ही मुश्किल है. आपा-धापी के इस युग में च्च मध्यवर्ग में ऐसी महिला संभवतया कम ही होंगी जो अपनी प्रतिद्वंवी के पास भी पहुंचने का साहस करेगी. काश ऐसे लोग से यह दुनिया भर जाए तो सच्चा समाजवाद दूर न होगा.


1644 04.05.2011, at 13:31:14
Aapka Naam: योगेश चन्द्र उप्रेती
Email: yogesjhupr@gmail.com
Where are you from?: Almora, Uttarakhand
Rachana Ka Shirshak: परोपकार
Lekhak Ka Naam: योगेश चन्द्र उप्रेती
Comments: "परोपकार का अर्थ है दुसरो की भलाई करना।"
आपकी लिखी हुई साड़ी सुक्तिया ज्ञानवर्धक तो है ही साथ ही साथ मनोबल भी बढाती है . . . आपका बहुत बहुत धन्यवाद


1643 04.05.2011, at 13:10:10
Aapka Naam: डॉ.पूनम चतुर्वेदी
Email: punamchat@yahoo.co.in
Where are you from?: मुंबई
Rachana Ka Shirshak: कुदरत की करामात
Lekhak Ka Naam: अश्विन गाँधी एवं पूर्णिमा बर्मन
Comments:
जितने सुंदर चित्र, उतने ही सुंदर कैप्शन


1642 04.05.2011, at 06:22:03
Aapka Naam: neelam jain
Email: neelamj@yahoo.com
Where are you from?: USA
Rachana Ka Shirshak: Football
Lekhak Ka Naam: Purnima
Comments: 'Football' kahani padhi, bahut pasand aayi.


1641 02.05.2011, at 09:14:13
Aapka Naam: ashok sharma
Email: ashoks@bhel.in
Where are you from?: New Delhi
Rachana Ka Shirshak: Krishma Beauty Parlour
Lekhak Ka Naam: Indira Dangi
Comments: दिल को छू लेने वाली रचना है | कहानी में में विधवा स्त्री के प्रति अपने ही परिवार की निष्ठुरता, तथा पीड़ित स्त्री की दृढ़ मनोशक्ति का बहुत ही सुंदर चित्रण किया गया है | किसी भी रचना की सफलता का पैमाना होता है कि वह पाठक के मन को छू ले और पाठक उसके साथ तादात्मय स्थापित कर ले | इस सुंदर रचना के लिए लेखिका को हार्दिक बधाई |


1640 29.04.2011, at 17:03:19
Aapka Naam: Sandeep Prajapati
Email: Sandeepkumar3210@gmail.com
Where are you from?: Bhatipura, meerut, up
Rachana Ka Shirshak: Bemisal bel
Lekhak Ka Naam: Sandeep
Comments: Isko padhkar to mazaa aa gaya bhai!
Garmiyon mein sukoon mil gayaa.
Main to kahta hun ki tum sab b ABHIVYAKTI padhkar sukhi ho jao re


1639 27.04.2011, at 17:46:13
Aapka Naam: ARPIT
Email: ARPITHARSH@GMAIL.COM
Where are you from?: INDORE MP INDIA
Rachana Ka Shirshak: जहाँ से चले थे
Lekhak Ka Naam: मनमोहन गुप्त
Comments: वास्तव में यही संसार है. हर घटना जीवन में दोहराई जाती है. आज वृद्धा आश्रम खुल रहे हैं उसका मूल कारण माता-पिता की उच्चाकांक्षाएं हैं. लेखक की यह वेदना की दो बेटे पिता को नहीं पाल सकते, अपनी जगह ठीक है, किंतु थोडा विचार करें कि क्या माता-पिता तथाकथित पब्लिक स्कूलों में भेजकर बच्चों को स्वयं से दूर करने का मार्ग प्रशस्त नहीं करते हैं? पहले तो ये अभिभावक बच्चों को भतिकता में डूबो देते हैं और फिर सारा दोष भी उन्हीं के सिर मडते हैं.

हाँ यह थीक है कि जब हम किसी प्रिय को नहीं पा सकते तो मन व्यथित होता है, लेकिन समय हर दुख को मिटा ही देता है और प्रत्येक व्बक्ति स्व में ही जीता है. कोई किसी के लिए खुद को नहीं खोता. जैसा कि कहानी में मंजू ने किया वैसा इस भौतिकवादि युग में दुर्लभ है.


1638 27.04.2011, at 16:49:26
Aapka Naam: siddharth
Email: sid.srms@gmail.com
Where are you from?: bareilly
Rachana Ka Shirshak: murkhta me hi hoshiyari hai
Lekhak Ka Naam: gyaan chaturvedi
Comments: vaah.. murkhon ko samman dilane me apki bhumikla sarahniya .. kabil-e-tarif hai !!

ummeed hai... aisi hi samajhdaar murkhtayen jari rahengi !


1637 27.04.2011, at 16:28:43
Aapka Naam: arpit
Email: arpitharsh@gmail.com
Where are you from?: indore mp India
Rachana Ka Shirshak: बूँदी
Lekhak Ka Naam: चैतन्य सक्सेना
Comments: बूँदी के विषय में इतना कुछ जानना वास्तव में रोचक रहा.


1636 27.04.2011, at 16:02:17
Aapka Naam: arpit
Email: arpitharsh@gmail.com
Where are you from?: indore mp India
Rachana Ka Shirshak: सोने की कुर्सी
Lekhak Ka Naam: अभिज्ञात
Comments: मानव में ही वह पारस है जो सोने को लोहे व लोहे को सोने में बदल सकता है. यह सब होता है हमारी अच्छी और बुरी भावनाओं के कारण. जब सुरेश बहुत अच्छी भावनाओं के साथ सुंदर कविता लिख रहा था, तब उसकी कुर्सी सोने की हो गई, लेकिन जब वही सुरेश पीढीत हो कर कविता लिखने लगा तो आराम कुर्सी फिर से लोहा हो गई. सच्ची समृद्धि हमारे मन में बसती है. यह कहानी बहुत ही रोचक एवं इसका संदेश बहुत स्पष्ट है. कुर्सी के बिम्ब को भी बहुत ही उपयुक्त ढंग से प्रस्तुत किया गया है. सुरेश का कुर्सी के पुराने स्वरूप से लगाव उसकी मूल प्रवृत्ति की और लौटने का संकेत है.

Back to ABHIVYAKTI
Previous    Next

<< 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 >>
Notice : Phaistos Networks has no responsibility for the content featured in this Guestbook
Free Pathfinder Guestbooks by Pathfinder - The Greek Portal

©1996-2013 Phaistos Networks S.A.